Table किनारे पड़ा वो glass जो दिखा
क्या मालूम था
कि इसे तो बस
पल अगले ही
था छलक के गिर जाना
क्या मालूम था
कि कितनी ही कोशिश क्यों न कर लू मैं
ना आसान होगा अब भूल जाना अब कुछ
सब कुछ
कभी
न रहेगा पहले जैसा
पर कोई बात नहीं
जी लेंगे यूँ ही
जो हैं अब बची कुची ...
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